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Big Breaking:-आंगनबाड़ी और आशा कार्यकर्ताओं के मानदेय व नियमितीकरण का मुद्दा उठा, विधायक विनोद कंडारी ने सीएम को लिखा पत्र

देवप्रयाग विधायक ने मानदेय बढ़ाने, कटौती रोकने और आशा कार्यकर्ताओं के नियमितीकरण की उठाई मांग

देवप्रयाग विधानसभा क्षेत्र के विधायक विनोद कंडारी ने आंगनबाड़ी और आशा कार्यकर्ताओं से जुड़ी समस्याओं को लेकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को पत्र भेजकर त्वरित कार्रवाई की मांग की है। अलग-अलग पत्रों के माध्यम से विधायक ने मानदेय वृद्धि, कटौती रोकने और नियमितीकरण जैसे अहम मुद्दे उठाए हैं।

आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के मानदेय बढ़ाने की मांग राज्य के साथ केंद्र से भी
विधायक कंडारी ने अपने पत्र में उल्लेख किया है कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को दिए जा रहे मानदेय में वृद्धि की जानी चाहिए। उन्होंने राज्य सरकार से 140 रुपये प्रतिदिन की वृद्धि करने और केंद्र सरकार को 150 रुपये प्रतिदिन बढ़ाने का प्रस्ताव भेजने का अनुरोध किया है। पत्र में यह भी कहा गया है कि वर्तमान मानदेय कार्यकर्ताओं की जिम्मेदारियों के अनुरूप नहीं है, इसलिए इसमें सुधार आवश्यक है।

मानदेय कटौती पर उठाया सवाल
पत्र में एक महत्वपूर्ण मुद्दा मानदेय में कटौती का भी उठाया गया है। विधायक ने कहा कि बिना स्पष्ट आदेश (जीओ) के 300 रुपये की कटौती नहीं की जानी चाहिए। पहले शासन स्तर पर स्पष्ट आदेश जारी हो, उसके बाद ही कोई कटौती लागू की जाए। इस मांग के पीछे तर्क दिया गया है कि बिना स्पष्ट नीति के कटौती करना कार्यकर्ताओं के हितों के खिलाफ है।

आशा कार्यकर्ताओं के नियमितीकरण की भी है मांग
पत्र में विधायक कंडारी ने ब्लॉक देवप्रयाग (टिहरी गढ़वाल) की आशा कार्यकर्ताओं की ओर से उठाई गई मांगों को मुख्यमंत्री तक पहुंचाया है। आशा कार्यकर्ताओं को निश्चित मानदेय देने, उनके नियमितीकरण की प्रक्रिया शुरू करने का आग्रह किया गया है। विधायक ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं में आशा कार्यकर्ताओं की भूमिका बेहद अहम है, इसलिए उन्हें स्थायित्व और सम्मानजनक मानदेय मिलना जरूरी है।

सीएम से शीघ्र कार्रवाई का अनुरोध
विधायक कंडारी ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि संबंधित विभागों को आवश्यक निर्देश जारी कर समस्याओं का समाधान कराया जाए। उन्होंने इसे जनहित से जुड़ा मुद्दा बताते हुए प्राथमिकता देने की बात कही है। विधायक विनोद कंडारी द्वारा उठाए गए ये मुद्दे राज्य में हजारों आंगनबाड़ी और आशा कार्यकर्ताओं से जुड़े हैं। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार इन मांगों पर क्या निर्णय लेती है।

क्या है आंगनबाड़ी और आशा कार्यकर्ताओं का महत्व

-आंगनबाड़ी और आशा कार्यकर्ता ग्रामीण स्वास्थ्य और पोषण व्यवस्था की रीढ़ हैं।

-मानदेय और सेवा शर्तों में सुधार से उनकी कार्यक्षमता और मनोबल बढ़ेगा।

-राज्य स्तर पर नीति बदलाव का रास्ता खुल सकता है।

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